👉 बह्र - बहर-ए-जमील मुसम्मन सालिम
👉 वज़्न - 12122/12122/12122/12122
👉 अरकान - मुफ़ाइलातुन मुफ़ाइलातुन मुफ़ाइलातुन मुफ़ाइलातुन
पयाम-ए-चाहत मिला तो होगा पता न होना बहाना होगा
मेरी मुहब्बत में क्या कमी थी सनम ये तुम को बताना होगा
हाँ माना मुझसे ख़ता हुई थी मैं भी हूँ इंसाँ ख़ुदा नहीं हूँ
नज़र से तुमने गिराया मुझको तुम्ही को आकर उठाना होगा
उठा के पलकें गिराना उसका लबों पे फूलों सी मुस्कुराहट
संभल के रहना ए मेरे यारों न जाने किस पर निशाना होगा
हो खूबसूरत बला सी उस पर है सादगी भी गज़ब तुम्हारी
कोई तुम्हें देख ले नज़र भर कसम से तेरा दिवाना होगा
है पाक दामन मिरी मुहब्बत सनम ज़रा सा यक़ीन कर लो
तुम्हें कसम है मिरी वफ़ा की नक़ाब रुख़ से हटाना होगा
कठिन सफ़र है अदू ज़माना नहीं है आसान राह-ए-उल्फ़त
जो तू है मेरा मुझे न परवाह चाहे दुश्मन ज़माना होगा
मिलेंगे काँटे मिलेगा सहरा, कहीं पे दरिया , कहीं पे तूफ़ाँ
जो चाहो मंजिल को पाना पहले सफ़र में ख़ुद को थकाना होगा
रहेगा मम्नून "शाद" उनका जो पास मेरे अगर वो आए
मैं मुंतज़िर हूँ अज़ल से उनका न आएँ हैं वो, न आना होगा
👉 मम्नून - आभारी , thankful
👉 अज़ल - अनादिकाल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







