Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

अक्स से संवाद : एक आत्म-साक्षात्कार

एक दिन मेरे अक्स ने कहा—
अपनी रूह की गहराई में उतर,
ज़रा ख़ुद को पहचान।

मेरे अहम् ने मुस्कुराकर कहा—
मुझे सब पता है,
यह मेरी ज़िन्दगी है
और मुझसे बढ़कर कोई नहीं ।

अक्स ने फिर कहा—
जो दिखता है, वह सच नहीं,
इस चमक में कोई उजाला नहीं।
ज़रा अपने भीतर झाँक,
ज़रा ख़ुद को जान।

मेरे अहम् ने फिर कहा—
बस मैं ही मैं हूँ,
मुझसे ख़ास कुछ भी नहीं।
यह सब मेरा है,
इससे बड़ी कोई सच्चाई नहीं।

बेचैन हुआ अक्स फिर बोला—
क्यों इस भ्रम में जीता है?
रूप, रंग, शोहरत, यह अहम्—
सब यहीं रह जाना है।
बाहरी माया में उलझा तू,
अपने मन में क्यों उतरता नहीं ?

यह सुन मेरा मन ठहर गया,
और फिर बोला—

अज्ञान और माया के इस अंधे कुएँ में
गिरा हुआ हूँ मैं,
अब निकलूँ कैसे?
इच्छाओं और तृष्णा की आग में
जलता हुआ हूँ मैं,
अब ख़ुद को बचाऊँ कैसे ?

अक्स ने धीरे से कहा—
जिस क्षण “मैं” नहीं रहेगा,
उसी क्षण “वह” नज़र आएगा।
अहम् का पर्दा हटते ही
तू अपने वास्तविक अक्स से मिल जाएगा।
वन्दना सूद


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (8)

+

सरिता पाठक said

अति सुन्दर रचना, लाजवाब 👌आपको सादर प्रणाम 🙏

वन्दना सूद replied

🙏🙏

Lekhram Yadav said

स्वंय से रूबरू कराती और आत्म दर्शन कराती एक खूबसूरत और लाजवाब रचना आपको सादर नमस्कार वन्दना जी।

वन्दना सूद replied

🙏🙏namaskaar sir

उपदेश कुमार शाक्यावार said

गहराईयों में ले जाती रचना.. आपको प्रणाम

वन्दना सूद replied

🙏🙏

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

वाह क्या बात है। मन से अहंकार मिट जाए तो जिंदगी आसान हो जाती है। आत्मचेतना की सुंदर मनोभाव। सादर प्रणाम।

वन्दना सूद replied

🙏🙏

पवन कुमार "क्षितिज" said

जिस सच्चाई को हम सब जानते हो उसको बहुत ही करीने से आपने सजा दिया है...बहुत ही शानदार..👌👌👌👌👌

वन्दना सूद replied

एक कोशिश अपने लिए

ममता तिवारी said

बहुत सुंदर रचना काफी सुंदर लाजवाब बहुत खूब🙏👌🙏👌

वन्दना सूद replied

Shukriya ji

कृष्णा शर्मा said


बहुत खूबसूरत रचना 👏👏👏
सादर प्रणाम 🙏

वन्दना सूद replied

🙏🙏

ममता तिवारी said

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं आपको और आपके परिवार को 👌🙏👌🙏

वन्दना सूद replied

Aapko bhi rakshabandhan ki bahut bahut badhai

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Devraj malviya

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Apr 26, 2025 | संस्मरण | Devraj malviya  | 👁 1,280,185
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