वो लम्हे जो चुपचाप दिल में उतर गए,
बिन कहे कुछ.
आँखों में बसते थे जो सपनों की तरह,
सच होने से पहले ही बिखर गए।
कुछ मुलाकाते अधूरी थीं,
कुछ यादें अधूरी थीं
हर मुलाकात एक ख़ामोश सवाल थी,
जवाब में बस खामोशी ही हासिल थी।
साथ चलने की जो ख्वाहिश थी कभी,
वक़्त की राहों में वो भी खो गई।
जो बात कहनी थी दिल से दिल तक,
वो पन्नों में ही दबी रह गई।
अब जब लौटते हैं वो पल ,
सीना एक दर्द से भर जाता है।
कभी चाह कर भी न कह सके,
वो लम्हे आज भी बहुत याद आते हैं।
– शंखेश्वरीय हितेश
बुक. अधूरे.... लम्हे
पब्लिकेशन – Gyan Publisher
2025 , Gujarat
Contact -
Instgram - @ii_hitesh777
@gyan_publisher
gyanpublisher@gmail.com


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







