आरजू तुमको पाने की
हमने की थी आरजू, तुम को पाने की
लग गई है हमें नजर, इस जमाने की
क्या मालूम था हमें ये भी हो जाएगा
जरूरत थी कहां किसी, को बताने की
प्यार, और यह खुशबू, छुपते हैं कहां
आ जाते हैं निगाहों में ये जमाने की
रास ना आए ये, जात धर्म के बंधन
मिट गई हर आरजू, उनको पाने की
तड़प रहा है ये दिल, हो कर बेकरार
समझ में आएगा कहां ये जमाने की
मसला नहीं है सिर्फ जिस्म पाने का
ये कहानी है रूह से रूह को पाने की
होता ना सवाल ये इज्जत का यादव
क्या जरूरत थी हमें दिल लगाने की
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







