तू अग़र सुनता ख़ामोशी मेरी तो फिर बात क्या थी
तू अग़र होता चाँद तो ये अमावस की रात क्या थी
आईने रखता हैं तू अपने बंद पुराने अँधेरे कमरे में
यकीं का दिया होता तो इश्क़ में तहकीकात क्या थी
जादू टोना कर देता तू अग़र अपनी शिद्दत बातो का
मुहब्बत में इससे बड़ी मेरे लिए कोई सौगात क्या थी
तेरी आँखों कहती अग़र तेरी मुहब्बत का अफसाना
सारी दुनिया का रब ठुकरा दूँ फिर ये जात क्या थी
मुझक़ो यकिं नहीं दुनिया के किसी भी ख़ुदाया पर
वो वक़्त पर देता खुशियाँ तो गम-ए-बारात क्या थी
दिल मायूस बना भी तो तेरे बेरुख़ लहज़े से जानाँ
तू समझ जाता इसे तो दिल पर कोई घात क्या थी
कृष्णा क़ो संभालने अब आए तो वो मौत के फरिस्ते
आख़री वो अग़र ज़ज़्बात थे तो फिर खैरात क्या थी...
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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