आओ फिर से गांव चलें
ठंडी-ठंडी राहों में आओ फिर से गांव चलें
नदी, किनारे वाले घने पेङों की छांव तले
सोंधी मिट्टी की खुशबू, कितनी प्यारी है
उस बरगद और पीपल की ठंडी छांव तले
महकी, सी खुशबू में, लिपटी हैं मेरी यादें
कहता है दिल मेरा, आओ फिर गांव चलें
मां-बाबा और बुजुर्ग सारे करते याद मुझे
बहती आशीषों की गंगा जिनके पांव तले
बदल रही है नई सोच से सूरत गांवों की
देखे सपने मैंने पीपल की ठंडी छांव तले
करता है दिल जिसका संग मेरे आ जाए
यादव, के संग आ जाओ, फिर गांव चलें
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







