"शिव-नगरी अरेराज"
चंपारण के मस्तक पर जो, सज रहा दिव्य सितारा है,
अरेराज का कण-कण देखो, लगता कितना प्यारा है।
जहाँ शीश झुकाती दुनिया है, श्रद्धा का पावन आज है,
भोले की अद्भुत नगरी वो, गौरवमयी अरेराज है।
चंद्रदेव ने तप कर पाया, पंचमुखी शिवलिंग यहाँ,
सोमेश्वर नाम पड़ा तभी से, बसा शिव का धाम यहाँ।
सतयुग से कलियुग तक, विराजे भोले अविरल यहाँ,
अरण्यराज से अरेराज हुआ, महिमा अपरंपार यहाँ।
यहाँ साक्षात महादेव विराजे, सोमेश्वरनाथ का धाम मिला,
जिसकी अविरल करुणा से ही, मुरझाया हर फूल खिला।
इतिहास गवाही देता जिसका, वो अशोक स्तंभ मुस्काता है,
अध्यात्म और गौरव का संगम, यहाँ का कोना-कोना गाता है।
इस पावन मंदिर की गद्दी का, बढ़ता नित-नूतन मान यहाँ,
स्वामी रविशंकर गिरी जी का, गूंज रहा सम्मान यहाँ।
पीठाधीश के रूप में जिनकी, दिव्य और पावन वाणी है,
उनके तप और सानिध्य से, धन्य हुई शिव-कल्याणी है।
नित भोर सवेरे शंख बजे, और महाकाल की आरती हो,
ऐसा लगता है देवलोक से, उतरी गंगा-भारती हो।
श्रद्धा के दीये जलते हैं, मिट जाता हर अंधियारा है,
भोलेनाथ की चौखट पर, झुकता यह जग सारा है।
सावन की रिमझिम फुहार में, जब काँवरिया झूम के चलता है,
'हर-हर बम-बम' के जयकारों से, सारा अंबर भी पिघलता है।
केसरिया रंग में रंग जाता, भक्तों का पावन संसार यहाँ,
अमीर-गरीब का भेद मिटे, ऐसा है भोला दरबार यहाँ।
गंडक की शीतल बयार जहाँ, हर मन की थकान मिटाती है,
अरेराज की पावन माटी, सचमुच जीना सिखलाती है।
यह सिर्फ एक नगरी नहीं, यह तो चंपारण की शान है,
शिव की इस पावन बगिया को, मेरा सौ-सौ बार प्रणाम है।
बाबा सोमेश्वरनाथ दयालु, हर विपदा को हर लेते हैं,
जो सच्चे दिल से शीश नवाए, उसकी झोली भर देते हैं।
पल्लवी के शब्दों में गूंजे, इस पुण्य भूमि का गान यहाँ,
अरेराज की पावन माटी, सदा बढ़ाती चम्पारण का मान यहाँ।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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