Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।


Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat


Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.



The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।

Newसभी पाठकों एवं रचनाकारों से विनम्र निवेदन है कि बागी बानी यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करते हुए
उनके बेबाक एवं शानदार गानों को अवश्य सुनें - आपको पसंद आएं तो लाइक,शेयर एवं कमेंट करें Channel Link यहाँ है

The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

"सभी पिता की चाह — एक बेटी के लिए"

"सभी पिता की चाह — एक बेटी के लिए"

हर पिता के सीने में, एक ख्वाब पलता है,

बेटी की डोली सजे, पर आँखें नम करता है।

हँसते-हँसते विदा करे, ये हुनर कहाँ से लाए,

जिसे उँगली पकड़ चलाया, उसे पराया कैसे बताए।

मैं राजा नहीं चाहता, ना महल-दुमहल माँगूँ,

बस ऐसा घर माँगूँ जहाँ, मेरी बिटिया रानी लगे।

सोने-चाँदी के गहने नहीं, बस इज़्ज़त का टीका हो,

उसकी आँख के आँसू पर, सारा परिवार रोता हो।

जो मेरी लाडो की हँसी को, अपनी किस्मत मान ले,

उसके टूटे ख्वाबों को, फिर से जोड़ने ठान ले।

थका हुआ चेहरा देखे तो, चाय खुद बना लाए,

बीमार पड़े तो माँ बनकर, रात भर सिरहाने बैठ जाए।

मैं दौलत नहीं देखता, बस नीयत परखता हूँ,

मेरी बेटी के मान-सम्मान की, कीमत समझता हूँ।

गाली की जगह गीत मिले, तानों की जगह त्यौहार,

ससुराल नहीं लगे उसको, दूसरा मायका इस बार।

मैं दामाद नहीं ढूँढता, एक बेटा ढूँढता हूँ,

जो कहे "चिंता मत करो पापा, आपकी बेटी राज करेगी।"

जो मेरे बाद भी उसका, बाप बनकर खड़ा रहे,

मेरी परछाई बनकर, हर दुःख से लड़ा करे।

हर पिता की बस यही चाह, यही दुआ, यही अरमान,

बेटी जहाँ भी जाए, वहाँ मिले उसको भगवान।

डोली हँसते हुए उठे, खुशियों से घर आंगन भर जाएं,

मेरा सपनों का राजकुमार, हर बेटी को ऐसा इंसान मिले।

क्योंकि बेटियाँ बोझ नहीं, बाबुल के आँगन की शान हैं,

जिस घर जाएँ रोशन कर दें, माँ-बाप का अभिमान है।

रचनाकार — पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)




समीक्षा छोड़ने के लिए कृपया पहले रजिस्टर या लॉगिन करें

रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (4)

+

Lekhram Yadav said

बहुत खूबसूरत और लाजवाब रचना, आपको सादर नमस्कार।

आदर्श भूषण said

वाह! अत्यंत हृदयस्पर्शी, संवेदनाओं से परिपूर्ण और प्रत्येक पिता के मन की सच्ची अभिव्यक्ति। आपने बेटी के प्रति पिता के निष्कलुष प्रेम, चिंता, विश्वास और उसके सुखी भविष्य की कामना को अत्यंत मार्मिक शब्दों में चित्रित किया है।

रीना कुमारी प्रजापत said

Heart touching poem 🥰🤗 very nice

पल्लवी श्रीवास्तव said

हृदयतल की अनंत गहराइयों से आपसभी का धन्यवाद।🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹💐💐💐💐💐💐💐💐💐

वास्तविक रचनायें श्रेणी में अन्य रचनाऐं




लिखन्तु डॉट कॉम देगा आपको और आपकी रचनाओं को एक नया मुकाम - आप कविता, ग़ज़ल, शायरी, श्लोक, संस्कृत गीत, वास्तविक कहानियां, काल्पनिक कहानियां, कॉमिक्स, हाइकू कविता इत्यादि को हिंदी, संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, इंग्लिश, सिंधी या अन्य किसी भाषा में भी likhantuofficial@gmail.com पर भेज सकते हैं।


लिखते रहिये, पढ़ते रहिये - लिखन्तु डॉट कॉम


LIKHANTU DOT COM © 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम
Designed, Developed, Maintained & Powered By HTTPS://LETSWRITE.IN
Verified by:
Verified by Scam Adviser
   
Support Our Investors ABOUT US Feedback & Business रचना भेजें रजिस्टर लॉगिन