"प्रेमचंद की रचनाओं का सार"
'नमक का दरोगा' बनकर तुम न्याय की बात कहो।
'पंच परमेश्वर' बनकर तुम सत्य की राह दिखाओ।
'शतरंज के खिलाड़ी' बनकर तुम जीवन का खेल खेलो।
'ईदगाह' में जाकर तुम प्रेम की दुआ मांगो।
'कफन' की तरह तुम जीवन की वास्तविकता को समझो।
'सौत' की तरह तुम जीवन के संघर्षों को समझो।
'पूस की रात' की तरह तुम जीवन की कठिनाइयों को समझो।
'आत्माराम' की तरह तुम जीवन के उद्देश्य को समझो।
'दो बैलों की कहानी' की तरह तुम जीवन के मूल्य को समझो।
'बड़े भाई साहब' की तरह तुम जीवन के आदर्शों को समझो।
'बूढ़ी काकी' की तरह तुम जीवन के अनुभवों को समझो।
'मंत्र' की तरह तुम जीवन के रहस्यों को समझो।
'प्रेमचन्द' की रचनाओं में तुम जीवन का सार पाओ।
'सेवा सदन' की तरह तुम सेवा का मार्ग अपनाओ।
'प्रेमाश्रम' की तरह तुम प्रेम का पाठ पढ़ाओ।
'कर्मभूमि' की तरह तुम कर्म का महत्व समझो।
'रंगभूमि' की तरह तुम जीवन का रंग भर दो।
'निर्मला' की तरह तुम जीवन को शुद्ध बनाओ।
'गोदान' की तरह तुम जीवन का दान दो।
'कायाकल्प' की तरह तुम जीवन को नया रूप दो।
'वरदान' की तरह तुम जीवन को आशीष दो।
'प्रतिज्ञा' की तरह तुम जीवन को संकल्प दो।
'प्रेमा' की तरह तुम जीवन को प्रेम दो।
'देवस्थान रहस्य' की तरह तुम जीवन के रहस्यों को समझो।
'मंगलसूत्र' की तरह तुम जीवन को मंगलमय बनाओ।
'गबन' की तरह तुम जीवन के पापों को समझो।
'बड़े घर की बेटी' की तरह तुम जीवन के आदर्शों को समझो।
'पंचायत' की तरह तुम न्याय की बात कहो।
'सत्याग्रह' की तरह तुम सत्य की राह दिखाओ।
'प्रेमचन्द' की रचनाओं में तुम जीवन का सार पाओ।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार )


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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