।। महावीर स्वामी जी के पावन जयंती पर श्रद्धा सुमन।।
जियो और जीनें देने का जो मानव को मंत्र दिया।
जीव जन्तु सब पेंड़ पौध से हिल मिल जीनें तंत्र दिया।।
मानव को जो मानव गुण से भलीभाँति सम्पन्न किया।
उस महावीर स्वामी के चरणों में खुद पाकर धन्य किया।।
जिसनें करुणा पुन्ज स्त्रोत से पावन भू को सींचा है।
जहाँ अहिंसा परमो धर्म: लक्ष्मण रेखा खींचा है।।
एक घाट मृग सिंह संग में जो जलपान कराया है।
सहअस्तित्व के सुगम मार्ग का दर्शन जहाँ कराया है।।
तीर्थ तुल्य चंदन उस धरती का रज तिलक लगाते हैं।
जन्मभूमि उस भू को पाकर परम धन्य कह पाते हैं।।
देखि जगत को जलते शिव नें महागरल का पान किया।
क्रोधानल का समन दिगम्बर स्वामी नें स्नान किया।।
सत्य शान्ति उपकार स्वास्थ्य का बीज अनोखा बोया है।
अपने अनुपम सूत्र आचरण से धरती को धोया है।।
जो निर्विकार निष्काम दिगम्बर महावीर थे अवतारी।
वह भार उतारन धरा धाम हित आये थे उद्धारी।।
गैवीनाथ मिश्र शाहपुर रीवा
9200981625


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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