हद कॉमेडी – हँसी का महाधमाका
(मौलिक हास्य कविता)
सुबह-सुबह मैं घूमने निकला,
आईने ने मुझको देखकर कहा,
"भाई पहले बाल तो बना ले,
फिर दुनिया को दर्शन देना ज़रा!"
मैं बोला, "आईना जी, चुप रहिए,
आज तो मैं हीरो बनकर आया हूँ।"
आईना बोला, "हीरो बाद में बनना,
पहले चेहरा तो धोकर आया हूँ!"
चाय बनाने रसोई में पहुँचा,
चीनी समझ नमक डाल आया,
पहला घूँट जो पापा ने पीया,
मुझे देखकर बस मुस्कुराया।
बोले, "बेटा, नई रेसिपी है?"
मैं बोला, "हाँ, यह हेल्दी चाय है!"
मम्मी बोली, "हेल्दी कम,
पूरे घर की बैंड बजाई है!"
स्कूल पहुँचा बड़ी शान से,
जूते दोनों अलग-अलग थे,
एक काला, एक था सफेद,
दोनों अपने-अपने रंग में थे।
दोस्त बोला, "फैशन नया है?"
मैं बोला, "विदेशी स्टाइल है!"
पीछे से टीचर हँसकर बोले,
"लगता है आज बड़ा कमाल है!"
मैडम ने पूछा, "दो और दो?"
मैं बोला, "मैडम... थोड़ा सोचूँ!"
पीछे वाला दोस्त फुसफुसाया,
"चार बोल दे, वरना रो दूँ!"
मैडम बोली, "शाबाश बेटा!"
मैं बोला, "ज्ञान बड़ा गहरा है!"
दोस्त बोला, "ज्ञान नहीं,
पीछे से पूरा सहारा है!"
मोबाइल लेकर फोटो खींची,
फिल्टर दस-दस मैंने लगाए,
जब असली चेहरा सामने आया,
मोबाइल भी थोड़ा घबराए।
कुत्ता देखा गली के मोड़ पर,
मैंने सोचा दोस्ती कर लूँ,
बिस्कुट लेकर पास गया,
वह बोला, "पहले दूरी रख लूँ!"
भागा मैं फिर भागा इतना,
रिकॉर्ड सारे टूट गए,
पीछे कुत्ता, आगे मैं,
जूते भी आधे छूट गए।
रात को सोचा डाइट करूँगा,
बस सलाद ही खाऊँगा,
रसोई से जब खुशबू आई,
चार पराँठे खा जाऊँगा।
मम्मी बोली, "डाइट कहाँ गई?"
मैं बोला, "दिल हार गया!"
पराँठों की मीठी खुशबू से,
मेरा पूरा इरादा हार गया।
जीवन का यह नियम निराला,
हँसते-हँसते दिन बिताना,
मुश्किल चाहे कितनी आए,
चेहरे से मुस्कान न हटाना।
हँसी सबसे सस्ती दौलत है,
जिसका कोई मोल नहीं,
जो खुलकर सबको हँसा सके,
उससे बढ़कर रोल नहीं।
हँसते रहो, हँसाते रहो,
जीवन को मुस्कुराते रहो।
दुख आए तो चाय पिला दो,
हँसी से उसको भगाते रहो!
— बालकवि हिमांशु दत्त 795


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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