(बाल कविता)
गोल-मटोल बड़ा कद्दू
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गोल-मटोल बड़ा कद्दू ।
छप्पर पर है पड़ा कद्दू ।।
धूप सहे, बरसात सहे ।
जाड़ा भी दिन रात सहे ।।
कहीं घूमने जा न पाए ।
देख सभी को मुस्काए ।।
बच्चे कद्दू से बोलें ।
आओ मिल कर हम खेलें ।।
कद्दू बेचारा ऊपर ।
देख रहा बस इधर-उधर ।।
तभी जोर से चली हवा ।
कद्दू नीचे लुढ़क गया ।।
बच्चों ने कुछ सोच लिया
सीता फल को गोंच लिया
कद्दू के संग खेले सब ।
नहीं अकेला था वह अब ।।
मन कुप्पे-सा फूल गया ।
हिंडोले में झूल गया ।।
सबको ही आनंद मिला ।
एक-दूजे का संग मिला ।।
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~राम नरेश "उज्ज्वल"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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