हे कान्हा!
आप प्रेम हैं प्रकाश हैं
सृष्टि की संपूर्ण आस हैं
कण-कण में हैं जन-जन में हैं
सर्वत्र आप व्याप्त हैं
गोकुल का माखन चोर
सृष्टि का भाग्य विधाता
आपके बारे में क्या लिखूं
कुछ समझ में नहीं आता
देवकी मां की आंखों का तारा
यशोदा मां का लाडला
माखन की मटकी फोड़ने वाले
जगत के आप उजाले हैं
माखन चुरा-चुरा कर खाते
मैया जब पकड़ने आतीं
खूब आप मंद-मंद मुस्कुराते
सिर पर घुंघराले बाल
जिस पर सजता मोर मुकुट है
कर में सुंदर मुरली मधुर
जो प्रेम का राग बरसाती है
सांवला-सलोना रूप
मन को हर लेता है
मुरली की मधुर धुन
सबको लुभाती है
मधुर मुरली की धुन सुन
राधा जी खुद को न रोक पातीं हैं
दौड़ी-दौड़ी अपने कान्हा से
मिलने आ जाती हैं
राधा जी के प्रेम का
बस सार आप हैं
मीरा जी के भजनों में गूंजती झंकार
द्रौपदी जी की लाज बचाने वाले
आप हैं जगत में सबसे महान
हे कान्हा!
आप प्रेम भी हैं
आप संहारक भी हैं
इस डूबती नैया का
आप खेवनहार हैं
आपके चरणों में आकर
मिट जाता हर अंधेरा
आपकी भक्ति में ही छुपा है
जीवन का सबेरा
सबके मन मंदिर में बसे हैं
आप हे गिरधर गोपाल
आप ही हैं आदि-अंत
आप ही जग के पालनहार
भोले-भाले नटखट कान्हा जी
करते सब पर कृपा अपार
जो भी शरण में आता
कर देते उसका बेड़ा पार
रणभूमि में सारथी बनकर
अर्जुन जी का संशय दूर किए
गीता का पावन ज्ञान सुनाकर
जग को नया प्रकाश दिए
जब-जब अधर्म बढ़ता है
आप प्रकट हो जाते हैं
पापियों के नाश करने के लिए
आप धरा पर कदम बढ़ाते हैं
मिट जाता है तमस सारा
जब आप हाथ में
सुदर्शन उठाते हैं
न्याय की स्थापना करने
आप कान्हा जी
हर युग में आते हैं
हे गोविंद! हे गोपाल!
आप ही हैं जीवन के आधार
चरणों में आपके अर्पित है
मेरा यह शत-शत प्रणाम।।
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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