बड़ी हस्ती
मैं एक समारोह में बुलाया गया। दिन सुहावना था, जेब भरी थी।
गेट पर एक आदमी खड़ा था। उसने शाल ओढ़ा दी, एक फूल थमा दिया।
अंदर भीड़ थी। मैं बीच में जगह देख रहा था।
मेजबान बोला, "आगे आइए।"
मैंने कहा, "बीच में ठीक है। आगे बड़े लोग हैं, वो बात नहीं करते।"
वो बोला, "आप मुख्य अतिथि हैं।"
मैंने कहा, "मैं? कब से?"
वो बोला, "समारोह आपके लिए ही है।"
मुझे सामने लाकर बिठा दिया गया।
मंच से महिला बोली, "आज हमारे बीच देश की सबसे बड़ी हस्ती मौजूद हैं।"
मैंने बगल वाले से पूछा, "कौन है ये?"
वो बोला, "आप ही।"
मैंने कहा, "तो नाम लो। ये बड़ी हस्ती क्या होता है?"
वो बोला, "नाम आएगा सर।"
महिला फिर बोली, "इन बड़ी हस्ती के सम्मान में तालियां।"
तालियां बजीं।
मैंने कहा, "नाम काट दिया। लोगों को बताओ तो कि मैं यहाँ क्यों बैठा हूँ।"
लड़का दौड़ कर महिला के पास गया, "मैडम, नाम..."
महिला ने पेपर देखा, "पेपर जैसा लिखा है, वैसे ही आएगा।"
लड़का लौटा, "आएगा सर।"
महिला बोली, "अब हम बड़ी हस्ती का माल्यार्पण करेंगे।"
मेरे गले में माला डाल दी गई।
मैंने माला उतारी, उसे उस लड़के को थमा दी और बीच वाली खाली कुर्सी पर जाकर बैठ गया।
मैंने कहा, "ये माला अपनी बड़ी हस्ती को पहना दो। मुझे मेरा नाम और मेरी बीच वाली कुर्सी वापस दे दो।"
परदा।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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