भक्ति रस
प्रभु आपका संसार सागर कितना गहरा है यह तो हम नहीं
जानते ,
पर इस सागर की लहरें बहुत ऊँची-ऊँची हैं ।
हम में न इतनी भक्ति है और न ही इतनी बल,बुद्धि ,विवेक
हमें हठी,चंचल,नासमझ और अज्ञानी बालक जान हमारा हाथ पकड़ कर पार ले जाइए ,
आपके साथ के बिना इन काम,क्रोध,लोभ,मोह की लहरों को पार करने की हम में क्षमता नहीं है ।
-वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







