मछलियां वर्षों से
मारी जाती हैं,
भूख मिटाने के लिए।
पानी घर है उनका,
रहने के लिए।
मगर तुम्हारे शहर
को बसाने के लिए,
बरबाद कर दिए
घर जो बने थे
मछलियों के लिए।
मछलियां मिटा
सकती थीं तुम्हारी
भूख।
मगर तुमने अपनी
हवस का जहर
घोल दिया पानी में।
कसूर क्या था
मछलियों का?
जो उनका सब कुछ
मिटा दिया
किसी के लालच के लिए।
निर्दोष, मासूम सी
आँखें जो परोसी जाती हैं
तुम्हारी प्लेट में
मनपसंद भोजन की
चाहत के लिए।
तैर रही हैं पानी पर
स्थिर आसमान की ओर
टकटकी बांधे
पूछती कुछ प्रश्न
भूख मिटाना क्या काफी
न था?
फिर पानी में जहर
क्यों घोला गया?
आदमी का कानून
आदमी का भगवान
हमारे कितना काम आया?


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







