" ज़िन्दगी तुझसे और क्या चाहे ''
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हर नारी के भीतर अपार शक्ति, सौंदर्य और संवेदना का एक असीम संसार छिपा होता है। आवश्यकता होती है, उसे पहचानने, अपनाने और निखारने की। यह लेख नारी को बाह्य सौंदर्य के साथ-साथ आंतरिक शक्ति, आत्मविश्वास और संतुलित जीवनशैली के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आज की स्त्री को चाहिए कि वह स्वयं से प्रेम करे, स्वयं का सम्मान करे और स्वयं को महत्व दे—क्योंकि जब एक स्त्री स्वयं को पहचान लेती है, तो वह दुनिया को बदलने की ताक़त रखती है
इसमें कोई संदेह नहीं कि आज बदलते समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है। पहले की तुलना में आज की नारियाँ अपने सौंदर्य, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व को लेकर कहीं अधिक सजग हैं। यही कारण है कि हर आयु वर्ग की स्त्रियाँ युवा, सुंदर और आत्मविश्वासी नज़र आना चाहती हैं। इसके लिए वे आधुनिक तकनीकों और उपायों का सहारा भी लेती हैं, जो उन्हें आकर्षक बनाने में मदद करते हैं।
यह सर्वविदित है कि सौंदर्य आत्मविश्वास को बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, परंतु इसके बावजूद आज भी ऐसी अनेक महिलाएँ हैं जो अपने स्वास्थ्य, सौंदर्य और व्यक्तित्व के प्रति उदासीन रहती हैं, और इसका परिणाम उन्हें जीवन में असफलताओं के रूप में भुगतना पड़ता है।
यदि आप भी उनमें से एक हैं, तो सतर्क हो जाइए! थोड़ा प्रयास, थोड़ी लगन और थोड़ा आत्म-स्नेह… यही काफ़ी है आपको एक आकर्षक, सफल और संतुलित व्यक्तित्व की स्वामिनी बनाने के लिए।
स्वयं में उत्साह उत्पन्न करें
,********अपने मन में उत्साह और आनंद का संचार करें। यह आपको जीवन में आगे बढ़ाता है और समाज में पहचान दिलाता है।
अपने मन का रखें ख़्याल
*******************अपने मन को उदासी और अवसाद से दूर रखें। अपनों से मिलिए, अपने पसंदीदा कार्यों में व्यस्त रहिए—यही आत्मशांति का मार्ग है।
कुछ समय अपने लिए भी निकालें
************ब्यूटी पार्लर जाएँ, कोई किताब पढ़ें या कोई शौक अपनाएँ। यह समय आपको ऊर्जा से भर देगा।
व्यर्थ की बातों से दूर रहें
हर मिनट अनमोल है
इसे नकारात्मक बातों में न गंवाएँ। लक्ष्य बनाइए और उसकी दिशा में अग्रसर रहें।
ख़ुद को न करें नज़रअंदाज़
**********************परिवार के साथ-साथ स्वयं को भी महत्व दें। खुद की देखभाल भी आपकी जिम्मेदारी है।
शिकायतों से बचें
**************हर वक्त शिकवा-शिकायत करने से बेहतर है—कृतज्ञता का भाव अपनाना।
कभी न करें किसी की निंदा
**********************यह आत्मविश्वास की कमी का लक्षण है। दूसरों को निहारने से बेहतर है स्वयं को सुधारना।
सहयोग की भावना रखें
******दयालुता, सहयोग और सह-अस्तित्व—यही आपके व्यक्तित्व को परिपूर्ण बनाते हैं।
संतुलित व्यवहार अपनाएं
हर परिस्थिति में संयम और सकारात्मक दृष्टिकोण रखें। संतुलन ही सफलता की कुंजी है।
स्वयं में लाएं बदलाव
दूसरों को बदलने से पहले खुद में सुधार की शुरुआत करें।
जीवन को सरल बनाएं
उम्मीदों से भरा जीवन तभी सुंदर बनता है जब उसे सकारात्मक दृष्टिकोण से जिया जाए।अपनों का साथ न छोड़ें परिवार ही संबल है—हर परिस्थिति में उनका साथ ही आपकी शक्ति है।
सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें
****************************विनम्रता और मधुरता ही सच्ची सुंदरता है। शब्दों का चयन आपके व्यक्तित्व को परिभाषित करता है। सभी से मित्रवत व्यवहार करें मधुर संबंध ही आपको सामाजिक सहयोग दिला सकते हैं। आकर्षक व्यक्तित्व के लिए सलीके से पहना गया परिधान, सौम्य बॉडी लैंग्वेज और आत्मविश्वास यही वास्तविक सौंदर्य हैं।अंत में बस इतना ही कहूंगी ” तुझसे बस तेरा ही पता चाहे
ज़िन्दगी तुझसे और क्या चाहे”
बस इतना कि हम स्वयं से प्रेम करें, अपने आपको समय दें और जीवन को एक खूबसूरत अनुभव बना लें। जब हम अपने भीतर के सौंदर्य को पहचान लेते हैं, तब यह दुनिया भी हमें सर-आँखों पर बैठाती है।
डाॅ फ़ौज़िया नसीम शाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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