हथियारों और बारूदों के फार्मूले
और कविता का लालित्य
इंसानी मस्तिष्क में पलते रहे..
आयुध की गंध में लिपटी
सुबह की एक पलक में प्रेम
स्वप्न की कसक भी बाकी थी..
घोर गर्ज़ना के स्तब्ध करते शोर
में कुछ स्वर लहरियां भी धीमे से
सुन पड़ती है..
और इंसान का इंसानियत के विरुद्ध
रण अनवरत हुआ जाता है..
चमन में फूलों की जगह उग रहे
बारूद की मुट्ठियों वाले हाथ जिनको
दिखता नहीं कुछ भी, और वो चलने
को उद्धृत हैं..
मैं फिर भी एक कोने में बैठा
लिख रहा हूं प्रेम और सौंदर्य की
कविता, मुझे परवाह नहीं कि
मेरे इर्दगिर्द मंडरा रहे हैं ,
बारूद लिए हुए
कई कई ड्रोन...
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







