मेरी जिन्दगी में दर्द ठहरे मेहमान की तरह।
ख्वाहिशें रखी नही मस्त रहे सहर की तरह।।
पहले कभी लगा नही आजकल महसूस होता।
बातों की कमी से झुरझुरी है बुखार की तरह।।
अपनी आँखों से दरिया कभी बहा नही सोचो।
थोड़ी तकलीफ़ रहती यादो में बहार की तरह।।
काश आते नही तो कम से कम बात कर लेते।
बेदर्दी के घाव दिल में चुभते नासूर की तरह।।
फिर भी सबेरे जैसा निभाना चाहता 'उपदेश'।
मिलने की उम्मीद जगाना चाहूँ वीर की तरह।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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