खाबो का वो अंधेरा
मुझे रोज रुलाता है
तुफानो से गुजरा कल
हर दिन तडपाता है
बिखरे इन पत्तों को
हर रोज समेटते है
धुंडते है उस मे अपना
जो अरमान खोया है
खोया व अरमान जो
उस समय ने तोडा है
याद दिला के हर बार
मुझे बार बार तोडा है

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
खाबो का वो अंधेरा
मुझे रोज रुलाता है
तुफानो से गुजरा कल
हर दिन तडपाता है
बिखरे इन पत्तों को
हर रोज समेटते है
धुंडते है उस मे अपना
जो अरमान खोया है
खोया व अरमान जो
उस समय ने तोडा है
याद दिला के हर बार
मुझे बार बार तोडा है
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