आज भी मेरे दिल में, उसके लिए प्यार है,
वो लौटने वाला नहीं पर उसका इंतजार है।
वो अब बन गया किसी के माथे का सिंदूर,
कमबख़्त दिल अब भी उसका तलबगार है।
मुहब्बत किसी से शर्तों पर नहीं हो सकती,
जिसने रख दी शर्त उसको कहाँ ऐतबार है।
मैंने लिख दी है ज़िंदगानी अब उसके नाम,
उसको जो भी स्वीकार है, मुझे स्वीकार है।
मैं अब इसके सिवा और करूँ भी तो क्या,
मुझे तो सिर्फ उससे प्यार, उससे प्यार है।
🖊️सुभाष कुमार यादव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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