झूठों की इस दुनिया में, तूँ आज भी सच्चा लगता है,
बिछुड़ा था तब भी बच्चा था, आज भी बच्चा लगता है।
पत्थर दिल दुनियां में, तूं दिल से कच्चा लगता है,
तेरी हर बात ही मुझको, हीर का किस्सा लगता है।
वक्त ने रुख बदला लेकिन, तू वैसा ही अच्छा लगता है,
तेरी यादों की बारिश में, मन फिर भी बचपन रचता है।
झूठे चेहरों के मेले में, तू अब भी सच्चा लगता है,
तेरा भोला सा मुस्काना, जैसे कोई सपना लगता है।
माना कि मिलना मुश्किल है, अगले जन्म में सोचेंगे,
तुम कुछ वक्त मेरे थे, यह सोच के अच्छा लगता है।
@छगन सिंह जेरठी
-Chhagan Singh Jerthi


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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