तुम्हारी खुशबू को पहली बार समझ पाई।
जब हवा जिस्म को छू कर मेरे पास आई।।
साँस के माध्यम से अंतरात्मा से मिलकर।
विरही जिस्म में जठराग्नि को सुलगा पाई।।
दीवाना हो गया मन तलाशने तुमको लगा।
तुम्हारी उपस्थिति का ठिकाना जान न पाई।।
हवा का जल्दी-जल्दी रुख बदलना 'उपदेश'।
तुमसे मिलने की ललक तब से थम न पाई।।
प्रार्थनाओं का दौर और उपवास के संग-संग।
किसी कोने में मन्नतें बिलखती रुक न पाई।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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