हे बहती कश्ती सा जीवन
था कल वहां है आज यहां
कल किनारा कहीं और होगा
है कुछ पल का बाकी आसरा
आगे गुजारा कहीं और होगा
चलता रहेगा जीवन मरण
जैसे बहता पानी नदियों का
तू मृत्यु से ना घबराना
आना द्वारा कही और होगा
होगा फिर से जीवन शुरु
कहीं और नया सवेरा होगा
बन जाए पंछी कोयल सा
जिसकी बोली घोले मिठास
ना बोली चाहे कागा सी
जो सबके ह्रदय भरे खटास
क्या पता बन जाएं भंवरा
ले उड़े कलियों का चैन
हो सके बन जाए खचरा
जो सबकी करे सहन
ये जीवन चक्र मरण का है
जगह-जगह पर न्यारा होगा
था कल वहां है आज यहां
कल किनारा कहीं और होगा,,
नीटू मावी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







