आज का दिन थोड़ा लंबा होता,
सफर सुहाना होता,
न जाने कितने दिन बाद मिले थे ,
उन दोस्तों से,
जो कहते थे चलो कल फिर मिलते हैं
अपने ठिकाने पे....।।
- सुप्रिया साहू

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
आज का दिन थोड़ा लंबा होता,
सफर सुहाना होता,
न जाने कितने दिन बाद मिले थे ,
उन दोस्तों से,
जो कहते थे चलो कल फिर मिलते हैं
अपने ठिकाने पे....।।
- सुप्रिया साहू
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