जहान में कोई नहीं है मेरा माता पिता , भाई बहन जीवित नहीं,बीबी बच्चे देखने में है मगर हमारे लिए नहीं है
कुछ रिश्ते ऐसे होते जो बगैर पैसे से निभते हैं मान सम्मान में बकिए सारे के सारे रिश्ते पैसे से निभते हैं वह भी अधूरा
हमने एक को माना है आ जीवन बगैर देखे मगर वह देखता है या नहीं कहना मुश्किल है फिर भी दिल में बसा है मेरे
मानिए मेरी तन्हाई जीवन बचपन से है मां नाबीना को देखता रहा मगर वह हमें देखने की हालत में नहीं जाहिरी तौर पर
बातनी में वह हमें देखते रहे और देख रहे हैं आज़ भी जबकि मां हयात से नहीं ये अहसास हुआ हमें इल्हामी ख़बर है
मानिए तो खुदा है तो रहमत का साया भी है गर खुदा पर यकीन धुलमिल है तंग दस्ती में सबके रहते कुछ नहीं है
हम हार गए अपनी ज़िंदगी खुदा की यकीन पर दुखों की इंतिहा है सब्र इब्तिदा से है इंतिहा आज भी है इब्तिदा में
वसी अहमद क़ादरी । वसी अहमद अंसारी
दरवेश । लेखक । पोशीदा शायर । 7 मार्च 2026


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







