चांद भी मुस्कुराकर कहने लगा
यूँ तो रोज़ दीदार होता है मेरा,
पर फ़क़त एक चाँद ही रहता हूँ,
तारों की महफ़िल में,
एक अलग ही एहसास हूँ,
आज कुछ खास हूँ मैं,
अनमोल हूँ,
क्योंकि आज मैं,
करवा चौथ का चाँद हूँ,
छुपता हूँ,निकलता हूँ,शर्माता हूँ,
सबको बेकरार कर,
थोड़ा इंतज़ार करवाता हूँ,
क्योंकि मैं करवा चौथ का चांद हूँ,
आज के दिन अपनी अहमियत दिखाता हूँ,
टिमटिमाते तारों का मैं सरताज हूँ,
हाँ, मैं ही करवा चौथ का वो चाँद हूँ,
चांद भी मुस्कुराकर कहने लगा
आज के दिन मैं बहुत खास हूँ,
क्योंकि करवा चौथ का चांद हूँ।।
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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