बचपन की याद बहुत आती
कभी भी मन से नहीं चली जाती
फिर फिर याद आके हँसी दिलाती
जब मैं बचपन एहसास करती
चेहरा फूलों के समान खिल जाती
मन में जब स्मृतियाँ आ जाती
तब तन गुलफाम से भर जाती
बार-बार कहने पर ऊब न आती
बार-बार कहने पर ऊब न आती ॥

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
बचपन की याद बहुत आती
कभी भी मन से नहीं चली जाती
फिर फिर याद आके हँसी दिलाती
जब मैं बचपन एहसास करती
चेहरा फूलों के समान खिल जाती
मन में जब स्मृतियाँ आ जाती
तब तन गुलफाम से भर जाती
बार-बार कहने पर ऊब न आती
बार-बार कहने पर ऊब न आती ॥
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