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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

आईने में जब तलक खुद

आईने में जब तलक खुद झाँकता नहीं है
अपनी ही सूरत आदमी पहचानता नहीं है

जर्रे जर्रे में रमा अस्तित्व उस भगवान का
आदमी पर उसको दिल से मानता नहीं है

मौसम दिखायेगा यहां नित नये तेवर उसे
जिस्म से थोड़ा पसीना जो ढालता नहीं है

दोस्त से दुश्मन है बेहतर वह हमेशा दास
कोई जहरी आस्तीन में जो पालता नहीं है

ले गया सारा उजाला घर का अपने साथ
अब चरागों में तेल कोई भी डालता नहीं है. .




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (4)

+

सुप्रिया साहू said

वाह, आईने में जब तलक खुद झाँकता नहीं है
अपनी ही सूरत आदमी पहचानता नहीं है
बहुत खूब दास सर 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

दुश्मन तो हमें हर पल सावधान करता है, इसलिए दुश्मन का होना भी जरूरी है। वाह!! दास सर जी। जिंदगी के खूबसूरत पहलुओं का दर्शन करा दिया आपने।इस भौतिक वादी युग में आध्यात्म से लोग दूर-दूर भागते हैं। सादर प्रणाम 🙏🌹🙏

आलम-ए-ग़ज़ल - परवेज़ अहमद said

वाह, दास जी! बहुत ख़ूब! 👌👌👏👏

जयश्री विलास जोधंळे said

बहुत अच्छा शिवचरन दास जी रचना अच्छी लिखी है नाम भी धार्मिक है कमेंट भी अच्छी किया करो किसी को तकलिफ नही होनी चाहीए

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