सत्य की ताक
जब तक उसे पा ना लू,
हारकर जी नहीं सकता।
शरीर और मस्तिष्क में जितनी दूरी है,
उतनी ही मनुष्य और ईश्वर में है,
मनुष्य और ईश्वर का मिलन उस महसूस से है,
जो धड़कन और साँसों के बीच में होता है।
मनुष्य होने की एक शर्त पूरी नहीं हुई, कि नारी को
देवी की जगह इंसान समझो और जीने दो, जैसे इंसान
सामान्यतः जीता है, सिर्फ इतना काफी है इंसानियत के
लिए।
हमने जब सत्य को स्वीकार किया है वो सत्य को उस पल का जीवन दान है, सत्य ही पूरे जीवन मनुष्य का श्रृंगार और उसकी गंध में शामिल है।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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