कविता:शहर और हम
दिनांक :21/05/2026
एक रिश्ता बना मेरा शहर की सड़कों से।
प्यार हुआ मुझको अपने शहर के लोगों से।
मैने हंसना सिखा शहर की कलियों से।
मैने चलना सिखा शहर की गलियों में।
शहर और हम एक दूजे की जान से।
दिल मेरा धड़कता मेरे शहर के नाम से।
दोस्त सारे खेला करते शहर के मैदान में।
अजीब नाता बन गया मेरा शहर के मकान से।
सब कुछ मिला मुझे बुजुर्गों के आशीर्वाद से।
मेरा शहर प्यारा लगता सारे जहान से।
छोटे से बड़ा हुआ मेरे शहर के मकान में।
नवरात्रि पर धूमधाम शहर की गलियों में।
दिवाली होली लगती प्यारी शहर की गलियों में।
कोई राम बनता कोई लक्ष्मण नवरात्रि की झांकी में।
एक रिश्ता बना मेरा शहर की सड़कों से।
प्यार हुआ मुझको अपने शहर के लोगों से।
सत्यवीर वैष्णव बारां राजस्थान 💞✒️💞


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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