तुफां से पेशतर तो, बदली हुई हवाओं का डर है..
गुलशन को बे-रुखी दिखाती, घटाओं का डर है..।
मुहब्बत को भुला देना तो अब मुश्किल काम नहीं..
मगर धड़कनों का दिल पर पर किए दावों का डर है..।
यूं तो कई, मेरे गुनाहों की फहरिस्त लिए फिरते हैं..
मुझे उनका नहीं, खुदा की दी सज़ाओं का डर है..।
वो आंसू भी बहाएं, तो मेरे दिल पे कोई असर नहीं..
मगर दिल से उठती, बे–मुरव्वत सदाओं का डर है..।
वो परवाने ना निकलें, इश्क़-ए-मंज़िल की जानिब..
कि जिनको मुहब्बत में, जल रही शमाओं का डर है..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







