सड़क के बीचोंबीच खड़ा,
वह बेज़ुबान जानवर,
नहीं जानता सड़क के नियम,
नहीं समझता रफ़्तार का कहर।
एक ओर भूख, दूसरी ओर गाड़ियाँ,
बीच में इंसान की मजबूरियाँ।
कभी वह खुद लहूलुहान होता है,
कभी कोई घर उजाड़ जाता है।
दुर्घटना के बाद सड़क पर,
कुछ बूँदें ख़ून की रह जाती हैं,
किसी की साँसें थम जाती हैं,
किसी माँ की आँखें पथरा जाती हैं।
न दोष उस बेज़ुबान का पूरा,
न समाधान उसे बेसहारा छोड़ना;
इंसानियत का अर्थ यही है—
हर जीवन को जीवन से जोड़ना।
सड़कें केवल वाहनों की नहीं,
न बेज़ुबानों की जागीर हैं;
सुरक्षित सड़कें, संवेदनशील व्यवस्था
यही सभ्य समाज की तस्वीर हैं।
डॉ. अखिलेश श्रीवास्तव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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