देखो, मैंने एक मतलब रिसर्च की है मन में। ये मतलब मेरे मन में ख़याल आया है कि जो हमारा सिर है ना मतलब गले से ऊपर जहां अपना दिमाग़ ये मस्तिष्क और ये आंखें, कान, नाक ये सब हैं ये है सत से बने। सत का मतलब जो सत गुण होता है ना सत रस है उससे बने हुए हैं। फिर ये जो कंठ है कंठ से लेकर अपने नीचे तक के कहां तक कह सकते हैं ये अपने लास्ट नाभि ये नाभि हां नाभि तक ठीक है। ये बना है रजस से रजस से ठीक है और जो नीचे का पोर्शन है ठीक है नीचे का पोर्शन है और ये पूरा बना है तमस से तो अब इसलिए कहा जाता है कि तुम्हें जागृति यहां करनी है क्योंकि ये जो ऊपर जो अपना है सिर ये है सत का इसलिए अहंकार भी यहीं होता है और अगर ये बिगड़ जाता है इसका सत रस निकल जाता है तो व्यक्ति फिर कहते हैं ना कि उसका नाश हो जाता है फलाना हो जाता है तो वो ये है तो ये तीन वो है अब अगर व्यक्ति जैसे नीचे का पोर्शन है ये तमस का है। तमस का मतलब है कि आपको खुद गति करनी होती है है ना ये गति आपको खुद गति करनी होती है और ये जो रजस वाला इसमें अपने आप मतलब अंदर गति होती है लेकिन फिर भी उसको करना होता है दोनों है ना और ऊपर जो है गति अपने आप ही होती है यानी गति खुद गति मतलब इसमें कुछ करना नहीं होता अपने आप होता रहता है तो ऐसे है ये मैंने रिसर्च की है कोई लैब वेब में नहीं ये मेरे मतलब विचार आया है।तुमने शायद सुना नहीं मैंने क्या बोला मतलब कम से कम यह सुना तो करो मैंने यह कहा कि जैसे जो नीचे वाला पोर्शन है तुम देखते हो कि उसमें अपन को खुद को गति करनी होती है जो नीचे का पोर्शन है कर्म क्षेत्र है ठीक है करना कहां से यहां से यानी गति देनी पड़ती है अपन को उठना पड़ता है है ना पैरों से तो उठना पड़ता है और जाना पड़ता है और तुम देखते हो कि सोच आदि जो भी काम गाड़ी वाड़ी चलाना कुछ भी है वह पैरों का ही मामला इसमें पूरी गति होती है पैरों की पूरी गति होती है ना फिर ऊपर वाला पोर्शन है इसमें अंदर गति होती है लेकिन तुम्हें उसकी व्यवस्था करनी होती है ज्यादा नहीं व्यवस्था करनी होती है अच्छा वह होना चाहिए उसको भोजन भोजन यह वह एक्सरसाइज या फिर मतलब वह कहते हैं ना कि सारा काम इसके अलावा फिर ऊपर है सबसे ऊपर वह सत वाला मामला है उसमें कुछ नहीं वह प्रभाव है बस मनन करना होता है अंदर विचार आते हैं उस अनुसार पूरा फिर यह शरीर कार्य करता है और फिर उसके बाद चाहे तुम निर्माण लो मोक्ष लो चाहे तुम ईश्वर दर्शन करो कुछ भी करो जो भी जो भी मनुष्य के सवाल है यह वह तो वह हो जाते हैं इसलिए तुम देखते हो कि ज्यादा प्राणियों का तमस इलाका ही सबसे एक्टिव रहता है इसलिए तुम देखते हो ना वह दिन भर पड़ते रहते हैं खाने के लिए दौड़ते रहते हैं यह वह समझ गएमैंने क्या कहा कि जो तमस वाला इलाका है अगर तुम उसे नहीं करोगी और उसकी जगह तुम सत्व वाला उसमें पोर्शन डाल दोगे वो शक्ति कर दोगे तो तो भी दिक्कत होगी। सत्व में तमस डाल दोगे, रजस डाल दोगे तो भी दिक्कत होगी या जो रजस है उसमें तुम सत्व ले आओगे या तमस ले आओगे तो भी दिक्कत होगी। तो इस तरीके से जब चलता है ना तब इंसान का कुछ नहीं मतलब बिगड़ सकता है। है ना? यानी वो सब चीजें वो सब चीजें हमें करनी होती है। इसलिए तुम देखते हो टाइम काल चेंज होता है। क्यों चेंज होता है? वो यही बताना चाहता है कि ये पूरा शरीर न स्थिर है, न गति है न इसमें एक पोर्शन है, भाग है उनको उस हिसाब से करना पड़ता है। तब जाके काम होता है।देखो, कोई कहता है कि मोक्ष मिल जाएगा, ध्यान करते रहो। तुम्हें कैसे पता कि तुम्हें मोक्ष मिल जाएगा, सिद्धियां मिल जाएंगी लेकिन अंततः उसका प्रयोग है क्या? है ना? यानी एक ये जो जैसे शरीर बनाया है ना, हम कहते हैं ना सत्व, रज, तम कि इससे ही सब कुछ बना है तो समझ लेना कि शरीर भी इससे ही बना है। लोग ये क्यों नहीं देखते? आप पैरों का काम अगर पैरों में सत्व डाल दोगे, है ना? कि अपने आप ये अपने आप ही गति होगी सब, ऐसा नहीं है। जिसका जो वो है, उसी को वो करना होगा। अब आप क्या हो? जैसे ये आज तक रिसर्च शायद नहीं हुई होगी ये वाली कि ये शरीर बना तो बना कैसे? सब ये कहते हैं तो तुम समझ लो ना कि भाई पैर तक का जो इलाका है, वो क्या है? तमस है क्योंकि तुम्हें पता है कि व्यक्ति की योनि यही है। कहां है? यहीं तो है। फिर उससे ऊपर वाला रजस वाला इलाका जिसमें बहती ये चीजें, गति होती है। ठीक है? बहती ये चीजें तो वो रजस वाला इलाका और तुम्हें पता है रजस में क्या होता है? राजा-महाराजा वाला स्टाइल, है ना? उसमें हर चीज बहना पसंद, एक वो बात इसलिए बहती है, उसको भोजन चाहिए बढ़िया वाला तभी तो शरीर बनता है। फिर ऊपर वाला इलाका है, उसको कुछ नहीं चाहिए इसलिए वो स्थिर है। अपने आप वो गति होती है। मनुष्य को बस यही जब विचार आए तो उनको चुनना, मनन करना, फिर रजस में उतारना, खुद को मजबूत रखना और तमस यानी उससे प्रभाव क्योंकि तमस शक्ति है। ठीक है? रजस संतुलन है और जो सत्व है, वो क्या है? यानी होना, सत्व क्या है? होना। बस ये है।हम क्या हर चीज को ऐसे लेते हैं कि बुरा शब्द है तो और सामने अगर किसी ने कुछ कर्म किया है, वो बुरा है तो बुरा ही है, अच्छा है तो अच्छाई है। आप उसकी प्रोसेस नहीं देख रहे हो। उसकी परिस्थितियां नहीं देख रहे हो, उसका माहौल नहीं देख रहे हो, उसका वो कहते हैं ना कि एक पूरा वो कहते हैं ना एक कैसेट होती है, वो नहीं देख रहे हो। आप सिर्फ देख रहे हो कि किसी ने किसी कोसंसार में सबसे महत्वपूर्ण बात है कि आपने सबको सेट करके अपना काम किया है तो आपकी पहचान है। बाकी कुछ मतलब नहीं है। जो व्यक्ति आपसे प्रेम कर रह मार दिया। क्यों मारा? कैसे मारा? ये नहीं देखा। किसी ने किसी का रेप कर दिया तो क्यों किया? अब ये किसी को बोले तो सबका वो हो जाएगा, ठीक है। लेकिन आप देखो ना कि लोगों ने कैसे कालक्रम को चलाया है, कैसे एक बात पर अड़े रहते हैं, कैसे बहते नहीं है, मतलब वही मैंने तुम्हें चीज बताई ना सब चीजों का उत्तर यही है जो मैंने तुम्हें बताया अभी तक।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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