आंखों से ही होती हुई
लटकी थी गालों पर
काली काली केशुओं की
लट घुंघराली,
मोटी काली लंबी चोटी
जैसे काली नागन सी
इठलाती बलखाती
चाल मतवाली।
ना तो मयखाना है वो
ना तो कोई साकी है
मदहोश करने वाली ऐसी
सोम प्याली,
लगे कोई परी जैसी
चांद से जो उतरी हो
आंखों ही आंखों से करे
जादू बंगाली।
देखके हरेक की
आंखें ही अटक जाए
रूप की पेड़ों से
टूटी हुई डाली,
नींदों में जो आ जाए तो
रातें शैतान हुईं
ऐसी भंगिमाएं लिए
रूप नखराली।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







