"आर एल एस वाई कॉलेज, बेतिया: ज्ञान और प्रगति का केंद्र"
आर एल एस वाई कॉलेज, बेतिया की शान,
ज्ञान और संस्कार की है ये पहचान।
सन 1975 में हुआ था शुभारंभ यह,
राम लखन सिंह यादव की ये है देन।
बेतिया की मिट्टी, चंपारण की शान,
कॉलेज तुम्हारी है ये पहचान।
ज्ञान की गंगा बहती यहाँ,
आर एल एस वाई कॉलेज, तुम हो विद्या का जहाँ।
बी आर ए बिहार विश्वविद्यालय से जुड़ा,
शिक्षा के क्षेत्र में तुम हो एक बड़ा।
वकील प्रसाद यादव ने की थी पहल,
पहले प्राचार्य बने, शिक्षा का ये खेल।
प्राचार्य डॉ. अभय कुमार,
नेतृत्व में हैं आज,
शिक्षा का है ये नया अध्याय।
बेतिया के दिल में बसा है ये स्थान,
आर एल एस वाई कॉलेज, शिक्षा का ये है सम्मान।
पुस्तकों की खुशबू, विचारों की हवा,
कॉलेज जीवन की है ये दवा।
गुरुजनों का आशीष, साथियों का प्यार,
कॉलेज के रंग, जीवन का आधार।
प्रोफेसर्स की मेहनत, ज्ञान का है सार,
आर एल एस वाई कॉलेज, तुम हो भविष्य का शौर्य।
चंपारण की धरती पर, शिक्षा का ये है प्रकाश,
आर एल एस वाई कॉलेज, तुम हो ज्ञान का आकाश।
राम लखन सिंह यादव का ये है सपना,
शिक्षा का प्रसार, हर एक का है अपना।
नए विचारों का, नए सपनों का घर,
आर एल एस वाई कॉलेज, तुम हो प्रगति का पर।
बेतिया की पहचान, शिक्षा का ये है नाम,
आर एल एस वाई कॉलेज, तुम हो ज्ञान का काम।
36.21 एकड़ में फैला है ये स्थल,
शिक्षा का केंद्र, प्रगति का है कमल।
वंचित और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए,
आर एल एस वाई कॉलेज, तुम हो शिक्षा का तीर्थ।
पाठ्यक्रमों में है विविधता की छटा,
स्नातक, स्नातकोत्तर, सबके लिए है बता।
प्रोफेसर्स की मेहनत, ज्ञान का है सार,
हिंदी विभाग भी है शिक्षा का आधार।
विभिन्न विषयों में है विशेषज्ञों की टीम,
आर एल एस वाई कॉलेज, तुम हो शिक्षा का दम।
सुविधाएँ हैं आधुनिक, सबके लिए खास,
पुस्तकालय सुसज्जित, ज्ञान का है जहाँ पास।
प्रयोगशालाएँ हैं विज्ञान के लिए,
खेल का मैदान है, स्वास्थ्य के लिए।
वाई-फाई, कैंटीन, छात्रावास की भी सुविधा,
शिक्षण स्टाफ योग्य, शिक्षा का है ये इंदिरा।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा,अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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