कविता: रिश्ते और जीवन का अनुभव
अनुभव से जीवन के ये रिश्ते संवरते-बिगड़ते हैं,
कभी तकरार, कभी इकरार, यहाँ सब एक-दूसरे पर मरते हैं।
सच्चे दिलों के अनमोल रिश्ते ही तो जीने का मज़ा देते हैं,
भाई-बहन के वफादार धागे, हर मुश्किल को बांट लेते हैं।
नदी की अविरल धारा सी बहती जाती है यह जीवन-यात्रा,
दिल बस यही सोचे छूटे ना कोई, टूटे ना रिश्तों की मात्रा।
पर स्वार्थ जो आ जाए बीच में, तो आत्मबल खो जाता है,
जो रिश्ता बड़ी आसानी से बना था, वो पल में टूट जाता है।
फिर रातों की नींद उड़ती है, दिल तन्हाई में रोता है,
रिश्तों को निभाना कितना मुश्किल, यह तब महसूस होता है।
खींचने से ज्यादा डोर को, वो आखिर हाथ से छूट जाती है,
तन्हाई की महफिल सजती है, और बस यादें रह जाती हैं।
सत्यवीर वैष्णव, बारां (राजस्थान) 💞✒️💞


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







