" लग गई उसे नजर", सामने वाले की अगर
रंग कवच लगाएंगे, लेखराम सर से रंग लेकर
पतझड़, सावन अगर मन को डसने लगे तो
रचाएंगे रीना की,"ओह मेरे प्रियतम" रंग लेकर
कदम कदम पर रंग अजब बिखरा हुआ है
वन्दना की "रहस्यमयी प्रकृति" रंग लेकर
"उसका नाम पुकार रही थी", सुप्रिया
मां के प्यार का, सबसे गहरा रंग लेकर
दिल की खुशियों की जरूरतें जो कम है
भर दें, क्षितिज की,"कम हो गई" रंग लेकर
" भीड़ में अकेला चला",मुकाम बनाएगा
ललित की , मानवता की रीत, रंग लेकर
निराशा से जो शापित हैं,"पीड़ित मन"
उन्मुक्त करें, उपदेश सर से रंग लेकर
रूठने वालों से,संधि वार्ता जारी रखें
श्रेयसी जी की " चाय का रंग" लेकर
विरासत की संस्कृति को जिंदा रखें हम
पल्लवी की"गौरवशाली बिहार" का रंग लेकर
रोकर भी मन को, हल्का करना सीखें
सरिता की"आंसू की भाषा" का रंग लेकर
रंग सभी का ले लेकर, भरूं भरके पिचकारी
आप सभी को रंग डालूं,अपना "समदिल" रंग लेकर।।
🌹❤️🙏 होली का त्योहार आप सभी के जीवन में खुशियों का रंग भर दें!!🙏❤️🌹
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







