मरने के साधन खुद को नज़र आए।
जीने का एक पल भी नही सुझाए।।
दो मीठे बोल के लिए तरसती रही।
कहीं समझ में अपना घर न आए।।
सदियों से प्रचलित प्रेम झूट लगता।
फिर भी नारी इसको समझ न पाए।।
मन की कोमलता विभीषिका ठहरी।
जीवन में ख्वाब सजाये लील जाए।।
ज़हर हीरे की अंगुठी में पहना दिया।
ओढ़ाई चुनरी 'उपदेश' पराया बनाए।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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