"वो प्यार ना करें वो उनकी मर्जी,
इतने दिल देखें हैं तो खबर तो है,
उनके राज़ ने ये कैसा देखा ख्वाब,
उनकी बाहों में जो बातों के थे गुलाब,
मेरे अकेलेपन को देखी है तभी डूबी है शराब,
शर्तों से घिरा है ये नसीब का मेला,
मेरे चेहरे की लकीरों से चलकर बनने लगी पगडंडी,
चाहतों के मलबे की जो टेड़ी नज़र पड़ी,
मेरी जिंदगी की पगडंडी चलते ही टूटने लगी,
थोड़ी थोड़ी टूटी इन पगडंडी जोड़ने लगा,
आगे देखा लंबी कतारें जो चाहतों की थी,
इसलिए इन प्यार की गति दिन दिशा दशा में,
अंधापन ना देखा,
रिश्ता कोई ना निभाए,
तो जानो दोनों के कहीं तो पग उलझे।।"
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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