प्रेम संधि
तुम्हारे इंतजार में,
हमारी आँखों में आँसू आते हैं,
कि हम तुम्हें ज़्यादा कुछ दे नहीं पाते हैं।
ग़म हो या खुशी दोनों के हिस्से तो आती है,
कभी इन्हें गले लगाकर ही
तुम्हारी समीपता महसूस हो जाती है।
हम दोनों काबिल तो नहीं हैं,
फिर भी प्रेम तो करते हैं,
हासिल दोनों को तन्हाई भी
बड़ी अच्छी लगती है।
कि दोनों उदास भी होंगे तो भी
खुशी है कि दोनों तो हैं,
दोनों का साथ ही तो
महसूस करना जानता है।
मैं क्या लिखूं जिससे तुम
और मैं मिलकर 'हम' बनें,
हम दो हैं अलग-अलग पर
हमारा साथ एक ही और इसमें
द्रव, प्रेम का रहे।
एक होने का बंधन ना हो,
ये प्रेम संधि हो।
यहाँ तुम और मैं मिलकर हम बने।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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