"अल्फ़ाज़ों की पल्लवी"
मेरी हर साँस की बंदगी, तुझको समर्पित हे प्रिय,
जहाँ हर अक्षर में तेरा ही मधुमास अंकित।
नाम के मायने में कोंपल-सी कोमलता,
और मेरी हर कविता में तेरी ही सरसता।
‘प्रेम’ की परिभाषा में केवल तेरा उल्लेख है,
‘प्राण’ के पर्याय में बस तेरा ही अभिषेक है।
‘नयन’ कहूँ तो झील-से तेरे नयन-सरोवर,
‘अधर’ कहूँ तो गूँज उठे वीणा-सी मधुर धरोहर।
‘स्पंदन’ की हर लय में तेरी पायल बजती है,
‘मौन’ की हर परत में तेरा ही नाम सजता है।
उपमा ढूँढूँ तो उपमान तू ही ठहर जाए,
रूपक बाँधूँ तो हर बिम्ब तुझ तक लौट आए।
अनुप्रास में तेरी हँसी की रुनझुन बँधी है,
यमक में तेरे नाम की ही अनुगूँज सधी है।
श्लेष में दो अर्थ नहीं, बस एक अर्थ तू है,
वक्रोक्ति भी सीधी लगे जब बात बस तू है।
मेरी लेखनी की स्याही अब केसर हो गई,
तेरे स्मरण से हर पंक्ति अमर हो गई।
छंद कहे या मुक्तक, हर बंध तेरा दास,
शृंगार रस के सिंहासन पर बस तेरा ही वास।
वियोग लिखूँ तो अक्षर भीग जाएँ आँसू से,
संयोग लिखूँ तो कागज़ महक उठे खुशबू से।
संध्या कहूँ तो तेरे गालों की लाली याद आए,
उषा कहूँ तो तेरी मुस्कान-सी किरन छा जाए।
ले जा ये बंदगी, ये भाव, ये छंद सारे,
मैं स्वयं काव्य हो चुका, अब अर्थ तू ही प्यारे।
जब तक शब्द रहेंगे, जब तक अर्थ रहेगा,
तब तक हर कविता में बस तू ही रहेगा।
क्योंकि तू नहीं तो अर्थ निरर्थक, शब्द सब बेजान,
तू है तो ही सार्थक है मेरा कवि होना, मेरा गान।
इसलिए हर युग में, हर जन्म में बस तुझे ही पाऊँ,
मेरी हर साँस की बंदगी, तुझको समर्पित हे प्रिय ।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार )


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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