"इमाम हर-सू नशे में, अदम के ओल रहे,
क़वायद नापाक रहे, अक़ूत इरादे रहे।"
जब समाज के रक्षक और मार्गदर्शक ही मदहोश होकर विनाश की ओट ले लें, और नियम-कानून केवल नापाक इरादों को पूरा करने का जरिया बन जाएं, तो उस व्यवस्था का अंत निश्चित है
इमाम: राह दिखाने वाला, धर्मगुरु, मार्गदर्शक या समाज का नेता।
नशे: मदहोशी, अंधा अहंकार, सत्ता का घमंड या भटकाव।
हरसूद (हर-सू): हर तरफ़, चारों दिशाओं में, सर्वत्र।
अदम: शून्य, नास्तित्व (Non-existence), अंधकार, या विनाश/मौत की वादी।
ओल: ओझल होना, पीछे छिपना, या किसी की आड़/शरण में होना।
क़वायद: नियम, क़ानून, अनुशासन, या चालबाज़ियाँ/पैंतरेबाज़ी।
नापाक: अशुद्ध, अपवित्र, भ्रष्ट, या बुरी नीयत वाला।
अक़ूत: असीमित, जिसकी कोई सीमा न हो, बेहद ज़्यादा (जैसे- अकूत घमंड या लालच)।
इरादे: नीयत, मक़सद या संकल्प।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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