तरसी हुई तेरी नजरे, नजरों, निगाहों का आलम में क्या कहूँ,
इशारे ही इशारे में तेरी वो नजरें, निगाहें मेरा दिल ले गयी,
कहने को तो केवल मेरी जान रह गयी है
----धर्म नाथ चौबे 'मधुकर'

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
तरसी हुई तेरी नजरे, नजरों, निगाहों का आलम में क्या कहूँ,
इशारे ही इशारे में तेरी वो नजरें, निगाहें मेरा दिल ले गयी,
कहने को तो केवल मेरी जान रह गयी है
----धर्म नाथ चौबे 'मधुकर'
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