इस जहाँ में क्या–क्या है, मिरे दम से..
मंज़िलें भी न पास आई, मिरे कदम से..।
भागा फ़िरा था, मैं दर-ए-मंदिर-ओ-मस्जिद तेरे..
फ़िर भी मैं न, महफ़ूज़ हुआ, तकदीर-ए-अलम से..।
सब मुक़र्रर है, फ़िर भी, दिल-ए-उम्मीद है कहीं..
वक़्त-ए-ख़िज़ाँ में, खुदा पूछेगा फ़ज़्ल-ओ-करम से..।
लिए फिरे थे हम, इलाज़-ए-हकीम-ओ-जाँ मेरी..
बस कभी पूछा नहीं हमने, हाल-ए-दिल- बरहम से..।
न दिल-ए-आरज़ू है, न आरज़ू है दिल में कोई..
बस ये हो कि, कोई उम्दा-ए-ग़ज़ल निकले मेरी कलम से..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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