मेरा चांद कहां है किसी को कुछ खबर ही नहीं है
जैसे रात तो है मगर उसमें कोई नूर ही नहीं है
तलाश में निकले हैं हम उसकी हर गली हर मोड़ पे
पर अजीब बात है उसका कोई शहर ही नहीं है
वो जो हंसी में छुपा देता था सारे दर्द मेरे
अब उसके बिना दिल को कोई असर ही नहीं है
हमने चाहा था जिसे अपनी हर एक दुआ से बढ़कर
आज किस्मत में भी उसका कोई जिक्र ही नहीं है
अब तो ख्वाबों में भी उसका आना कम हो गया है
जैसे आंखों में अब कोई इंतजार ही नहीं है
लोग कहते हैं मिल जाएगा सौरव (100₹v) एक दिन
पर दिल है कि मानता नहीं कोई सब्र ही नहीं है
अब तो आलम है कि खुद से भी अजनबी है हम
जैसे आईना भी कहता हो तू वो शख्स ही नहीं है
मेरा चांद कहां है किसी को कुछ खबर ही नहीं है..........


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







