प्रेम गहरा है समझकर शादी कर ली,
किसको पता था मैंने बरबादी कर ली,
थोड़ी सी खुशी और आंखों में आंसु भी,
जिंदगी भर मैंने उसकी गुलामी कर ली,
जिसे अपना समझा वही पराया निकला,
खुद ही के गले में मैंने फांसी भी कर ली,
हर तरफ पछतावा ही महसूस हुआ है,
उस पछतावे को मैंने जिंदगानी कर ली,
अब तो जीना भी है हर हाल में सुप्रिया,
ये घुटन को मैंने अपनी कहानी कर ली...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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