हे श्वेत कमल वासिनी!
मधुर वाणी मालिनी!
स्वर धरा की रंजिनी!
कृपालिनी की जय हो!!
गगन गगन गूंज रही
गीत तरंग घूम रही
धाराओं की कल कल में
पंछियों की दल दल में
व्याप्त मंद पवन में
डाली डाली कण कण में
वीणा की मधुर स्वर
प्रदायिनी की जय हो!!
श्वेत वस्त्र धवल धवल
चंद्र प्रभा शुभ्र नवल
हार में तुषार पुंज
सजी मणि बूंद बूंद
मुख चंद्र उज्ज्वला
हे मां भक्त वत्सला!!
श्वेत हंसवाहिनी,
वीणा वादिनि की जय हो!!
कंठ मेरी विमल करो!
लेखनी भी सफल करो!
मिश्रीमयि वाणी दे दो!
वाणी दे दो मिश्रीमयी
माता मेरी करूणामयी
स्नेह दो दुलार दो
आशीष और प्यार दो
हे मां सरस्वती!
वरदायिनी की जय हो!!
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







