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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

लूटकर क्या करोगे

लूटकर करोगे क्या,तुम जमीं हमारी
लूटा करके हम, आसमां आ गये हैं

तुम्हारी जानो तुम, और खुदा जाने हमारी
मिटा करके अपना ,नामों निशां आ गये हैं

खुश रहो! हमारी, देखकर तबाही तुम
भूला करके अपना,सारा जहां आ गये हैं

अजनवी हुए,तुम्हारे लिए अब हम
हमें पता नहीं, अब कहां आ गए हैं।।

( मेरे गांव में छोटे भाई के व्यवहार से तंग आकर बड़े भाई ने उसे ही अपना खेती बाड़ी और जमीन सौंपकर पूरे परिवार सहित अन्यत्र चले गए, बड़े भाई की भावनाओं का चित्रण की कोशिश)


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (7)

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जयश्री विलास जोधंळे said

बहुत ही खुबसुरती से अपने भाई के भावनाओ का प्रस्तुत किया है आपको सादर प्रणाम

आलम-ए-ग़ज़ल - परवेज़ अहमद said

वाह! वाह! क्या बात है! बहुत ख़ूब! बहुत अच्छा चित्रण, बेहद शानदार अक़्क़ासी किया है आपने, मनोज जी! बहुत ही बेहतरीन और बे-मिसाल रचना! आदाब! 👌👌👏👏❤️🙏🙂

वन्दना सूद said

पता नहीं आजकल पैसे की होड़ में सब संस्कारों से दूर क्यों होते जा रहे हैं ।एक time ऐसा जरूर आता है जब पैसा नहीं कोई अपना साथ चाहिए होता है फिर भी कोई समझता ही नही है

सुप्रिया साहू said

बहुत ही खूबसूरत चित्रण किया है आपने, जमीन के नाम के लिए लोग अपने ही परिवार से दूर हो रहे हैं, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

उपदेश कुमार शाक्यावार said

बहुत सुंदर रचना ... मनोज जी को सादर प्रणाम 🙏🙏

सरिता पाठक said

इंसान भूल जाता है कि एक दिन पैसा नहीं अपने ही काम आते हैँ पैसा जमीन जायदाद रखी रह जाती है, भाई की भावनाओं का बहुत सुंदर चित्रण 👌मनोज भईया जी को सादर प्रणाम 🙏

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

आप सभी को सादर प्रणाम करता हूं 🙏🌹🙏 बस, ऐसे ही अपनापन बनाए रखिए 🙏🌹🙏

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