लूटकर करोगे क्या,तुम जमीं हमारी
लूटा करके हम, आसमां आ गये हैं
तुम्हारी जानो तुम, और खुदा जाने हमारी
मिटा करके अपना ,नामों निशां आ गये हैं
खुश रहो! हमारी, देखकर तबाही तुम
भूला करके अपना,सारा जहां आ गये हैं
अजनवी हुए,तुम्हारे लिए अब हम
हमें पता नहीं, अब कहां आ गए हैं।।
( मेरे गांव में छोटे भाई के व्यवहार से तंग आकर बड़े भाई ने उसे ही अपना खेती बाड़ी और जमीन सौंपकर पूरे परिवार सहित अन्यत्र चले गए, बड़े भाई की भावनाओं का चित्रण की कोशिश)
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







