बहुत सोचा खुद को रोक न पाया।
कॉल कर दिया उन्होंने न उठाया।।
कई तरह के सवाल उस पल कौंधे।
सोच रहे थे पलटकर कॉल आया।।
पूछा किसलिए कॉल किया तुमने।
उन्होंने अपना लहजा बदल न पाया।।
जुबान की मिठास बिलकुल गायब।
सन्न रह गया 'उपदेश' हिल न पाया।।
नारी का स्वभाव पल-पल बदलता।
फूल कई बार खिले पर फल न पाया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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